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यूनिसेफ और एनएसएस ने ‘‘हम और कुछ नया सीखें’’ पहल में योगदान देनवाले वाॅलेंटियर्स को सम्मानित किया

रांची, झारखण्ड  | मार्च  | 29, 2022 : 29 मार्च 2022ः यूनिसेफ ने एनएसएस झारखंड और रांची विश्वविद्यालय के सहयोग से हातमा बस्ती के वंचित बच्चों के साथ बातचीत का एक कार्यक्रम आयोजन किया तथा इस अवसर पर उन स्वयंसेवकों को सम्मानित किया, जिन्होंने ‘‘हम और कुछ नया सीखे पहल’’ यानि ‘भ्।छैप्’ के तहत इन बच्चों को कोरोना काल में उनकी पढ़ाई-लिखाई में सहायता प्रदान की। ‘‘हांसी’’ पहल पिछले साल अक्टूबर में यूनिसेफ द्वारा रांची विश्वविद्यालय के सहयोग से शुरू की गई थी। आज आयोजित कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों को कोविड-19 महामारी के दौरान रांची की झुग्गियों में बच्चों को सीखने में सहायता प्रदान करने वाले एनएसएस स्वयंसेवकों को उनके अनुकरणीय कार्य के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रांची के सरना टोली स्थित हातमा बस्ती में किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रांची नगर निगम की महापौर डॉ आशा लकड़ा थीं। इस अवसर पर डॉ राजकुमार शर्मा, डीएसडब्ल्यू, रांची विश्वविद्यालय; सुश्री आस्था अलंग, संचार अधिकारी, यूनिसेफ झारखंड तथा डॉ ब्रजेश कुमार, एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक, रांची विश्वविद्यालय सह राज्य एनएसएस अधिकारी, झारखंड इस अवसर पर उपस्थित थे।

कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए रांची नगर निगम की महापौर डॉ. आशा लाकड़ा ने कहा,“हांसी कार्यक्रम के माध्यम से यूनिसेफ तथा एनएसएस झारखंड द्वारा संयुक्त रूप से प्रारंभ की गई इस पहल को देखकर काफी प्रसन्नता हो रही है, जिसके माध्यम से कोरोना संकटकाल के दौरान वंचित बच्चों को उनकी शिक्षा को जारी रखने में सहयोग प्रदान किया गया। आज जब एनएसएस वालेंटियर्स द्वारा प्रशिक्षित इन बच्चों को आत्मविश्वास से बोलते और अपनी बात रखते देख रही हूं तो मुझे काफी संतोष का अनुभव हो रहा है। यह इस पहल की सफलता है, जो दर्शाता है कि एनएसएस स्वयंसेवकों तथा यूनिसेफ के माध्यम इस पहल के तहत कितनी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया गया है। मैं इस पहल को तैयार करने और सही भावना के साथ लागू करने के लिए यूनिसेफ और एनएसएस झारखंड को धन्यवाद देना चाहती हूं। हमें इसका विस्तार करने तथा जिले के अन्य हिस्सों में स्थित झुग्गी बस्तियों में रहने वाले अन्य बच्चों तक इस पहल के माध्यम से कार्य करने की जरूरत है ताकि सभी बच्चे सीख सकें और अपनी शिक्षा को जारी रख सकें।’’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यूनिसेफ की संचार अधिकारी, सुश्री आस्था अलंग ने कहा, “हम और कुछ नया सीखें ‘भ्।छैप्’ को संयुक्त रूप से राज्य में यूनिसेफ और एनएसएस झारखंड द्वारा अक्टूबर 2021 में उन बच्चों को सीखने में सहायता प्रदान करने के इरादे से शुरू किया गया था, जिनके पास बुनियादी साधनों की कमी थी, जिसके कारण वे कोरोना महामारी के दौरान अपनी शिक्षा को जारी रखने में असमर्थ थे। जिस तरह कोविड 19 के प्रभाव की कोई सीमा नहीं है, उसी प्रकार से उसके समाधान की भी कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों को भी आगे आकर इसमे सहयोग देने की आवश्यकता है, ताकि प्रत्येक बच्चा सीख सके और अपनी पढ़ाई जारी रख सके। एनएसएस के 50 स्वयंसेवकों ने इसी उद्देश्य के साथ झुग्गी बस्ती के बच्चों को पढ़ने में मदद की और उन्हें अंग्रेजी, हिन्दी तथा अन्य सामान्य ज्ञान की जानकारियों से अवगत कराया। उन्होंने बच्चों के साथ मस्ती के साथ सीखने के रचनात्मक तरीकों का इस्तेमाल किया और बस्ती के अपने दौरे के दौरान पोस्टर बनाने की प्रतियोगिता, सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी, दौड़ प्रतियोगिता तथा खेल के माध्यम से शिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। विभिन्न अभिनव तरीकों के माध्यम से, स्वयंसेवकों ने इन हाशिए के बच्चों को शिक्षित किया। राँची में हातमा बस्ती के 40 बच्चों के साथ जुड़ने के लिए एनएसएस के साथ यह सहयोग बहुत महत्वपूर्ण रहा है। स्वयंसेवकों ने सुनिश्चित किया कि सभी बच्चों को सीखने की सुविधा मिले। समाज की सेवा के लिए समर्पित इन युवा स्वयंसेवकों को सम्मानित करना हमारे लिए खुशी की बात है।’’

डॉ राजकुमार शर्मा, डीएसडब्ल्यू, रांची विश्वविद्यालय ने कहा, ‘‘मुझे यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि कैसे इस पहल ने इन बच्चों के जीवन में बदलाव लेकर आया है, साथ ही हातमा बस्ती में भी खुशियां बिखेरी हैं। मैं इस पहल के उद्देश्य और एनएसएस स्वयंसेवकों के समर्पण की सराहना करता हूं, जिन्होंने इन बच्चों को पढ़ाने के लिए अपना समय और श्रम लगाया। हम और कुछ नया सीखें इनिशिएटिव ने न केवल वंचित बच्चों की मदद करने में एनएसएस वोलेंटियर्स को प्रेरित किया, बल्कि उन्हें समाज के लिए कुछ करने का भी मौका दिया।’’

सभी का धन्यवाद करते हुए डॉ ब्रजेश कुमार, एनएसएस प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर, रांची विश्वविद्यालय, सह राज्य एनएसएस अधिकारी, झारखंड ने कहा, “इस कार्यक्रम के तहत हमारे एनएसएस स्वयंसेवकों ने अनुकरणीय कार्य किया और रांची जिले के दो स्लम क्षेत्रों के बच्चों को उनकी पढ़ाई जारी रखने में सहयोग दिया। इस पहल और प्रयास ने इन बच्चों के अंदर एक विश्वास और आशा का संचार किया है। ये बच्चे अब अच्छे से अंगेजी और हिंदी के शब्दों का उच्चारण कर पाते हैं। इस कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए अब हमने रांची जिले के अन्य स्लम क्षेत्रों तक पहुंचने की भी योजना बनाई है, जहां हमारे स्वयंसेवक वंचित बच्चों को ‘‘इच वन-टीच वन’’ मंत्र की भावना के साथ पढ़ने और सीखने में मदद करेंगे।

हातमा बस्ती के 5 बच्चों (शीतल कुमार, आयुष, राहुल कुमार, अनमोल कुमारी तथा निधि) ने भी इस अवसर पर अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे इस पहल ने उनके स्कूल बंद रहने के दौरान सीखने और पढ़ाई जारी रखने में मदद की। उन्होंने कहा कि उनके पास कोविड-19 संकट के दौरान अपनी शिक्षा को जारी रखने के लिए कोई साधन नहीं था, उस दौरान यह पहल उनके लिए एक वरदान बनकर आया।

दो एनएसएस स्वयंसेवकों फातिमा फलक और दिवाकर कुमार ने भी अपने अनुभव के बारे में बताया कि कैसे वे इस पहल के माध्यम से कोविड-19 के दौरान शैक्षिक सहायता से वंचित झुग्गी-झोपड़ियों के बच्चों की सहायता के लिए प्रेरित हुए। उन्होंने बताया कि न केवल उन्होंने बच्चों को सीखने में मदद की, बल्कि, उन्हें किताबें, काॅपी तथा अन्य स्टेशनरी सामान भी प्रदान किए, जो उन बच्चों के लिए काफी मददगार साबित हुए।

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