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मानवीय संवेदना के बल सुलझा प्रवास संकट- सीमांत सिंह

रांची, झारखण्ड | जून | 28, 2020 ::

नैतिकता को सर्वोच्च मान निस्वार्थ भाव से प्रवासियों की मदद की
मानवीय संवेदना के बल सुलझा प्रवास संकट- सीमांत सिंह

चरणबद्ध तरीके से प्रवासियों को गंतव्य तक पहुंचाया – सीमांत सिंह
प्रवासियों की समस्या को हमने चुनौती में लिया – सीमांत सिंह

तैयारी में कमी के कारण गहराया प्रवासी संकट

देश में प्रवास संकट और मानवीय दृष्टिकोण पर वेबिनार का आयोजन. मानवीय संवेदना को सर्वोपरि मानकर की गयी लोगों की मदद.

टेड-एक्स-कांके ने ‘दि राइज ऑफ ए न्यू वर्ल्ड’ सीरीज के तहत कोरोना काल में ‘देश में प्रवास संकट व मानवीय दृष्टिकोण’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया. टेड-एक्स-कांके के फेसबुक चैनल पर इस वेबिनार की लाइव स्ट्रीमिंग की गयी. क्यूरेटर राजीव गुप्ता के संचालन में आयोजित वेबिनार के मुख्य वक्ता थे कर्नाटक राज्य के आईपीएस, आई जी पी एडमिनिस्ट्रेशन सीमांत कुमार सिंह.

वेबिनार में इस विषय पर आइपीएस सीमांत सिंह ने अपने व पुलिस महकमे के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि लॉकडाउन की शुरुआत में पूरे देश में अफरा-तफरी की स्थिति थी. अनिश्चितता की आशंका से घिरे लोग चीजों को जमा करने में जुटे हुए थे. लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा थी, जिनके पास पैसे नहीं थे. ऐसे लाखों लोगों की फौज सड़क पर थी. इनके पास रोजी-रोटी का कोई जरिया नहीं बचा था. इन प्रवासियों का सही आंकड़ा भी किसी के पास नहीं था. हमें भी नहीं मालूम था कि ऐसे लोगों के भोजन व आश्रय के संदर्भ में क्या करना है. तैयारी नहीं रहने से समस्या ने और विकराल रूप ले लिया. जब प्रेस ने ऐसे प्रवासियों की समस्या को उठाना शुरू किया, तो पुलिस व विभिन्न संगठनों ने मानवीय संवेदना को सर्वोच्च मानते हुए इनकी मदद का बीड़ा उठाया.

उन्होंने कहा कि प्रवासियों की बड़ी तादाद को उनके घर तक पहुंचाने, उनके लिए भोजन-पानी का इंतजाम करने, चिकित्सा व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रही थी. ऐसे में उन्होंने खुद का नंबर भी हेल्पलाइन नंबर के रूप में जारी कर दिया. जिसपर ज्यादातर फोन कॉल खाने-पीने व घर के किराये से जुड़े मामलों के आने लगे. उन्होंने कहा कि यदि प्रवासी मजदूर तकनीकी तौर पर सक्षम होते, तो शिकायतों की और बौछार होती. चूंकि सार्वजनिक यातायात बंद थे. ऐसे में लोगों को उनके घर तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी. हर राज्य के अलग नियम के कारण प्रावासियों को राज्य की सीमा को पार कराते हुए उन्हें घर तक पहुंचाने में पुलिस की पूरी टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया. लोगों को घर तक पहुंचाने के लिए किराये पर टैक्सी तक ली गई.

श्री सिंह ने कहा कि इस आपदा के दौर में मानवीय कार्य के लिए देश भर के लोगों से दान मिला. जिसके दम पर प्रवासियों की भोजन व आश्रय की जरूरतें पूरी करने में मदद मिली. बेंगलुरु में भी हमारे पास ऐसी ही टीम थी, जो नैतिकता को सर्वोच्च मानकर निस्वार्थ भाव से ऐसे प्रवासियों की सेवा करने में जुटी हुई थी. जब श्रमिक ट्रेनें शुरू हुई, तब भी चुनौती कम नहीं थी. लोगों को स्टेशन तक पहुंचाना, उनका पंजीकरण करना, भोजन का इंतजाम करने जैसे कार्य सामने थे. सबसे बड़ा चैलेंज था कि हजारों की भीड़ के कारण कहीं कोई भगदड़ न मचे. ऐसे में पुलिस की टीम ने बागडोर संभाली. अनुशासित ढंग से तमाम बाधारों को पार किया. चरणबद्ध तरीके से लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया. सिर्फ बेंगलुरू से ही करीब दो लाख मजदूरों को झारखंड व बिहार भेजा गया.

वेबिनार में अबुधाबी से प्रदीप सिंह, सुजाता कौरा, अमिटी रांची के वाइस चांसलर रमण झा, लायन्स सिद्धार्थ मजूमदार, बैंगलोर से दिव्या सोनाली मिंज आदि ने विषयवस्तु पर प्रश्न पूछे।

वेबिनार के सफल आयोजन में पवन कनोई, ज्ञान रंजन, अनल राय, कनिष्क पोद्दार, कनिका मल्होत्रा, विपुल मंयक, ऋषभ मल्लिक, प्रवीण राजगढ़िया ने अहम भूमिका निभाई ।

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