Media should tell the people about the loss and preventary measures of worm
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मीडिया, कृमि से होने वाले नुकसान एवं इसके बचाव की जानकारी लोगों तक पहुँचाएं : शैलेश कुमार चौरसिया, अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

Media should tell the people about the loss and preventary measures of worm

रांची , झारखण्ड | फरवरी | 07, 2020 ::
*राज्य के 12 जिलों में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जायेगा =========================
*शेष 12 जिलों में मार्च से जून तक फाईलेरिया रोधी दवा का चलाया जायेगा चक्र
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*मीडिया, कृमि से होने वाले नुकसान एवं इसके बचाव की जानकारी लोगों तक पहुँचाएं

— शैलेश कुमार चौरसिया, अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन*
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बच्चों में कृमि संक्रमण से जुड़े स्वास्थ्य समस्या के बचाव के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग झारखंड सरकार द्वारा 10 फरवरी 2020 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जा रहा है। झारखंड के 12 जिलों जामतारा, बोकारो, देवघर, कोडरमा, लातेहार, लोहरदगा, पाकुड़, पलामू, रामगढ़, साहिबगंज, धनबाद एवं सरायकेला के सभी स्कूलों और आंगनबाडी केंद्रों में 1 से 19 साल तक के सभी बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवाई खिलाकर कृमि मुक्त किया जाएगा। शेष 12 जिलों में मार्च से जून तक फलेरिया रोधी दवा का राउंड चलाया जाना है और यह डबल ड्रग मोड्युल के तहत चलाया जायेगा जिसमें कृमि मुक्ति हेतु एल्बेंडाजोल का भी कम्पोजिसन उपलब्ध होगा। उक्त जानकारी अभियान निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन श्री शैलेश कुमार चौरसिया ने आज सूचना भवन के सभागार में आयोजित प्रेस सेंसिटाइजेशन कार्यक्रम में दी। अनुपस्थित या बीमारी के कारण जिन बच्चों को 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर कृमि नियंत्रण की दवाई नहीं खिलाई जा सकेगी उन्हें 17 फरवरी 2020 को मॉप अप दिवस पर कृमि मुक्ति दवा दी जाएगी।

*8 फरवरी 2020 को सरायकेला से राज्य स्तरीय राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम की होगी शुरूआत

श्री शैलेश कुमार चौरसिया ने बताया कि 10 फरवरी को आयोजित राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस हेतु तैयारियां पूरी कर ली गई है। 8 फरवरी 2020 को सरायकेला से राज्य स्तरीय राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम की शुरूआत की जायेगी। उन्होंने कहा कि सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में एल्बेंडाजोल की दवाई पहुंचा दी गई है साथ ही रिपोर्टिंग फॉर्म भी भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस चक्र में 72 लाख बच्चों को कृमि मुक्त करना सरकार का लक्ष्य है। इस हेतु 19,555 स्कूली शिक्षकों 17,567 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं 18,073 सहियाओं को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

*कृमि संक्रमण की रोकथाम के लिये लोगों को जागरूक होना जरुरी

श्री शैलेश ने कहा कि सरकार द्वारा बच्चों में कृमि संक्रमण की रोकथाम के लिये लोगों को जागरूक करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया कि कृमि से होने वाले नुकसान एवं इसके बचाव की सही जानकारी लोगों तक पहुँचाएं।

*कृमि संक्रमण से पोषण और स्वास्थ्य पर प्रभाव

परजीवी कृमि संक्रमित लोगों की पोषण स्थिति पर कई प्रकार से प्रभाव डालते हैं। जीवित रहने के लिए कृमी संक्रमित व्यक्ति के उत्तक और खून पर निर्भर करते हैं, जिससे एनिमिया होता है। आंतों में विटामिन ए तथा लौह जैसे महत्वपूर्ण पोषक पदार्थों का अवशोषण रोकता है। एचटीएच संक्रमण से पोषण में कमी आने लगती है जिससे शारीरिक एवं मानसिक विकास पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

*इसके रोकथाम के लिए कुछ सावधानियां बरतने की आवश्यकता है

आसपास की सफाई रखें, जूते पहने, स्वच्छ शौचालयों का इस्तेमाल करें एवं खुले में शौच ना करें। हाथ साबुन से धोएं विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने के बाद। फलों और सब्जियों को साफ पानी में धोएं, खाने को ढक कर रखें। हमेशा साफ पानी पीए, नाखून छोटे और साफ रखें।

*कृमि मुक्ति के फायदे

कृमि मुक्ति से बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर सकारात्मक असर पड़ता है। एनिमिया में कमी और पोषण में सुधार होता है। संज्ञानात्मक मानसिक और शारीरिक विकास, संक्रमण प्रतिरोध की क्षमता में सुधार आती है। स्कूल में उपस्थिति भी बढ़ती है।

*इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाएं के निदेशक प्रमुख डॉ. जे पी सांगा, सूचना एवं जनसंपर्क के उप सचिव श्री मनोज कुमार, शिशु स्वास्थ्य कोषांग के उप निदेशक सह राज्य नोडल पदाधिकारी डॉ. अमर कुमार मिश्रा, स्वास्थ्य कोषांग के डॉ. अजीत कुमार एवं मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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