Breaking News

धनतेरस 25 को, जाने किस राशि के जातक, क्या खरीदें

रांची, झारखण्ड | अक्टूबर | 247, 2019 ::

यायीजय, स्थायीजय और यमघंट योग लेकर आ रहा है धनतेरस, होगी धन कि वर्षा भक्तों के घर – स्वामी दिव्यानंद
——————————————————————–
धनतेरस 25 को ……
पंचपर्व की आगाज है, धनतेरस….
धनतेरस, काली पूजा, भैया दूज, दवात पूजा, दीवाली, गोवर्धन पूजा,

शुक्रवार के दिन संध्या चार बजकर इकतीस मिनट तक त्रयोदशी रहेगा, अतः साढ़े चार बजे के पश्चात ही खरीददारी करना ज्यादा अच्छा होगा,

शुभ योग, दिन के —–
लाभ योग – 07.19 से 08.43
अमृत योग -08.43 से10.08
दिन —–
शुभ योग – 11.33 से 11.57
रात्री ——
शुभ योग – 11.33 से 01.08
अमृत योग – 01.08 से 02.44

उपर्युक्त योग के मध्य खरीदारी करना शुभ है।
(उत्तम समय – रात साढ़े आठ से दस बजे)

शुभ स्थिर लग्न —–
बृश्चिक – 08.09 से 10.25 सुबह
कुम्भ – 02.19 से 03.49 दिन
बृषभ – 06.55 से 08.50 सायं
सिंह – 01.23 से 03.36 रात
उपर्युक्त स्थिर लग्न में पूजा कर के से स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है,
(उत्तम लग्न – बृषभ एवं सिंह)

किस राशि के जातक, क्या खरीदें – धनतेरस में……

मेष – सोने के आभूषण,
सिक्के, पीतल के बर्तन
या मूर्ति,
बृष – चांदी के आभूषण, सिक्के
बर्तन या मूर्ति,
मिथुन – सोना, पीतल, कृषि से
सम्बंधित उपकरण,
कर्क – चांदी, वाटर कूलर,
फिल्टर,
सिंह – सोना, तांबे की मूर्ति,
बर्तन,
कन्या – सोने के आभूषण,
सिक्के,पीतल या कांसे के
बर्तन, मूर्ति,
तुला – चांदी, इलेक्ट्रॉनिक्स के
उपकरण, AC,
बृश्चिक – सोना, बिजली के
उपकरण, हीटर,
धनु – सोना, पीतल, कांसा,
मकर – सोना, चांदी, पीतल,
कांसा, स्टील,
कुम्भ – सोना, चांदी, पीतल,
कांसा, स्टील, वाहन,
मीन – सोना, पूजा के बर्तन,
पठन-पाठन से
सम्बंधित सामाग्री,

धनतेरस के दिन – माता लक्ष्मी, धनाध्यक्ष कुबेर जी, हजमान जी, भगवान धन्वंतरि जी की विशेष रूप से पूजा की जानी चाहिए।
दक्षिणावर्ती शंख, श्रीयंत्र, की भी पूजा करने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं,

दुकान / कर्मस्थल पर नए गद्दे- चादर इत्यादि बदलकर, अलमीरा, तिजोरी में पूजा करें,

धनतेरस के दिन शाम को पूजा करना श्रेयस्कर होता है। पूजा के स्थान पर उत्तर दिशा की तरफ भगवान कुबेर और धनवंतरि की प्रतिमा स्थापित करना चाहिए। स्थापना के बाद मां लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश जी की पूजा करनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि भगवान कुबेर को सफेद मिठाई और धनवंतरि को पीली मिठाई का भोग लगाना चाहिए। फल,फूल,चावल, रोली, चंदन, धूप व दीप के साथ पूजन करना चाहिए। इसी दिन यमदेव के नाम से एक दीपक निकालने की भी प्रथा है। दीप जलाकर यमराज को नमन करना चाहिए।

धनतेरस के दिन ——–
घर में नया झाड़ू, सूप खरीद कर लाएं,
तांबे, पीतल, सोना, चांदी इत्यादि के बर्तन, आभूषण, मूर्ति, सिक्के या घरेलू उपयोग की सामग्री सामर्थ्य में के अनुसार खरीद कर घर लाकर पूजा करें,

घर, दुकान, ऑफिस, के साथ मंदिर, गौशाला, नदी या तालाब के घाट, कुंआ, बगीचे में भी दीप दान करें,

धनवंतरि भी इसी दिन अवतरित हुए थे, इसी कारण इसे धनतेरस कहा जाता है। यह भी कहा जाता है कि देवताओं व असुरों द्वारा संयुक्त रूप से किए गए समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए 14 रत्नों में धनवंतरि व मां लक्ष्मी भी शामिल हैं इसलिए इस दिन को ‘धन त्रयोदश’ भी कहते हैं। भगवान धनवंतरि कलश में अमृत लेकर निकले थे, इस कारण इस दिन धातु के बर्तन खरीदने की परंपरा है।

स्मरण रहे – माता लक्ष्मी की सफाई एवं प्रकाश प्रिय है,
जबकि दरिद्रा को गन्दगी एवं अंधकार……””

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) के दिन, यम के नाम घर से बाहर
दीपदान करें, यम के भय,अकालमृत्यु से मुक्ति मिलती है।
तिल तेल से युक्त दीपक, घर के मुख्यद्वार के देहरी पर दक्षिणाभिमुख कर, गंध, पुष्प, अक्षत, से पूजनकर स्थापित करें,

पूजा-पाठ के बाद दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर रखना चाहिए। यह दीपक यमराज को नमन करने के लिए जलाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर रखने से घर में किसी की अकाल मृत्यु नहीं होती। साथ ही घर की सभी नकरात्मकताएं बाहर चली जाती है।
——————————————————————–

धनतेरस पर धनवंतरि देव की पूजा होती है. इनको आयुर्वेद का आचार्य भी कहा जाता है. ये देवताओं के वैद्य हैं. देव धनवंतरि को लक्ष्मी का भाई भी माना जाता है. इन्हीं के अवतरित होने से जुड़ी है धनतेरस के दिन बर्तन खरीदने की परंपरा. जब समुद्र मंथन हो रहा था तब सागर की अतल गहराइयों से चौदह रत्न निकले थे. धनवंतरि इन्हीं रत्नों मे से एक हैं.

जब देवता और दानव मंदार पर्वत को मथनी बनाकर वासुकी नाग की मदद से समुद्र का मंथन कर रहे थे, तब 13 रत्नों के बाद कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को 14वें रत्न के रूप में धनवंतरि सामने आए. वो अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे. धनवंतरि के प्रकट होते ही देवताओं और दानवों का झगड़ा शुरू हो गया. 0अमृत कलश के लिए देवताओं और दानवों के बीच छीना-झपटी शुरू हो गई. लेकिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धरकर अमृत कलश हासिल कर लिया.

धनवंतरि अमृत यानी जीवन का वरदान लेकर प्रकट हुए थे. आयुर्वेद के जानकार भी थे, इसलिए उन्हें आरोग्य का देवता माना जाता है. वैसे तो धन और दौलत की देवी लक्ष्मी देती हैं, लेकिन उनकी कृपा पाने के लिए सेहत और लंबी आयु की जरूरत होती है. यही वजह है कि धनतेरस के मौके पर धनवंतरि की पूजा की जाती है.

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को भगवान धनवंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस तिथि को बर्तन खरीदने की परम्परा है. माना जाता है कि धनतेरस के दिन आप जितनी खरीदारी करते हैं, उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है.

Leave a Reply