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कोविड-19,कोरोना वायरस की महामारी को रोकने में योग की भूमिका अहम :: संन्यासी मुक्तरथ

रांची, झारखण्ड | मई | 16, 2020 :: योग सदियों से मानव के स्वास्थ्य रक्षा और ध्यान प्राप्ति का शक्तिशाली उपाय रहा है।
चाहे संक्रमण से उत्पन्न बीमारी हो या शारीरिक दुर्बलता रोग का वजह हो, या मानसिक कमजोरी रोग का कारण हो , सभी में योग कारगर सिद्ध हुआ है।
आज के इस वैश्विक महामारी कोरोना के प्रभाव को कम करने में योग की अहम भूमिका प्रमाणित हो सकती है।
” कोरोना वायरस से बचाव का सुरक्षा कवच है बन सकता है योग ”
पूरे दुनियाँ को कोविड-19 (कोरोना वायरस) करीब पाँच महीने से त्रस्त कर रखा है।
लगातार एक के बाद एक देश कोरोना वायरस के चपेट में समाते चले गए।
अब तक के प्रभाव पर यदि दृष्टिपात किया जाय तो एक बात स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आ रहा है वो है कमजोर इम्युनिटी।
हमें यह सोचने को वाधित कर दिया है कि क्यों चीन, ईटली, फ्रांस,अमेरिका,इंगलैंड जैसे उन्नत राष्ट्र के लोग अत्यधिक संख्या में इस वायरस से संक्रमित हुए और इन राष्ट्रों में मृत्यु-दर अधिक रही?
इन देशों का आकलन करने पर यही पता चलता है कि जहाँ लोग अत्यधिक सुविधाभोगी हुए हैं, जहाँ अधिकतम लोग वातानुकूलित जिंदगी जीने लग गये, जहाँ डब्बा बन्द भोजन की प्रथा बढ़ी और जहाँ योग जैसे पवित्र साधना के नियम टूटते चले गए,योग डिस्को हो गया ,वहाँ व्यक्ति में रोगों से लड़ने की क्षमता क्षीण हो गई, लोगों के जीवन जीने का अनुशासन टूटते चला गया। मानसिक तनाव बढ़ गए और भय बढ़ गया। कोरोना के तेजी से बढ़ने का यह एक बड़ा कारण है।
आज जहाँ दुनियाँ के अनेकों देश के वैज्ञानिक कोविड-19 के वैक्सीन और दवाई की खोज में रात-दिन लगे हुए हैं, वहीं योग एक शक्तिशाली विकल्प के रूप में लोगों का जान बचाने और संक्रमण के खतरे को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

कोरोना से सर्वप्रथम गला, स्वसन मार्ग,और फेफड़ा संक्रमित होता है फिर पूरा शरीर प्रभावित होता है।
संक्रमण से ज्यादा लोग पेंडेमिक होकर रोग को और जटिल बनाते जा रहे हैं।
संक्रमित लोग यदि भयभीत न हों तो वो महज पाँच से छः दिनों में ठीक हो सकते हैं।
अब यहाँ योग को यदि जानने का कोशिश करें तो यह अद्भुत तरीके से कोरोना को मात दे सकता है।
पहला योग की ध्यान विधि- जो पेंडेमिक होने से बचाव करेगा।

हठयोग की प्रमुख दो क्रिया
वमन धौति (कुंजल क्रिया) और
जल नेति- नाक, स्वशन मार्ग, ग्रास नली,आमाशय और फेफड़े के आस-पास जमे म्यूकस को साफ कर शुद्ध करता है।
प्राणायाम – भस्त्रिका, नाड़ीशोधन, कपालभाति, उज्यायी, भ्रामरी जो फेफड़े और स्वशन मार्ग को शक्तिशाली बनाएगा तथा हृदय को भी सबल बनाएगा।
प्राणायाम मस्तिष्क को संतुलित कर मन को भी संतुलित व सबल बनाता है।
वहीं योग के कुछ प्रमुख आसन जिसमें
सूर्यनमस्कार,
पवनमुक्तासन भाग-1,
पवनमुक्तासन भाग-2,
उष्ट्रासन,
उत्कटासन
जैसे अभ्यास रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाने में मदद करता है।

कोरोना से बचाव और छुटकारा पाने हेतु योग के प्रमुख अभ्यास :—-
हठयोग में –
(1) वमन धौति(कुंजल क्रिया) , और (2) जल नेति,
आसन में —
————
(1) सूर्यनमस्कार, (2) पवनमुक्तासन भाग-1, (3) पवन मुक्तासन भाग-2, (4)उष्ट्रासन (5) उत्कटासन, (6) पादांगुस्ठासन

प्राणायाम —
————-
(1) भस्त्रिका (2) नाड़ीशोधन (3) कपालभाति (4) उज्यायी (5) भ्रामरी

ध्यान —
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(1)योगनिद्रा (2) अजपा जप
विशेष- योग किसी रोग की दवाई नहीँ है परन्तु यह अनेकों रोग को नष्ट कर सकता है। अनेकों रोग से लड़ने में शरीर को मजबूती दे सकता है।
” योग स्वस्थ जीवन जीने और जीवन शैली को अनुशाषित करने की विधा है।”
योगाभ्यास के साथ स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकार के द्वारा जारी नियमों का शक्ति से पालन करें। एक दूसरे के बीच की दूरी का पालन करें, बार-बार साबुन या फिटकिरी से हाथ धोना, बाहर निकलते समय नाक औऱ मुँह को ढँकना।
योग के जो अभ्यास दिए गए हैं उसे नियमित प्रातःकाल करें। प्रत्येक आसनों की 10 आवृत्ति करें। प्राणायाम को दोनों काल सुबह और संध्या करें तो ज्यादा अच्छा होगा। ऐसा करने से भारत में कोरोना का प्रभाव जल्द ही समाप्त हो जाएगा। योग की समग्र जानकारी नेट, यू-ट्यूब पर “मुक्तरथयोग” पर देख सकते हैं।

संन्यासी मुक्तरथ
योगाचार्य
अध्यक्ष, सत्यानन्द योग मिशन राँची
लेखक झारखण्ड के प्रतिश्ठित योग विशेषज्ञ और योग के व्यापक प्रचार-प्रसार का केंद्र ‘ सत्यानन्द योग मिशन केंद्र राँची’ के निदेशक हैं।

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